शनिवार, अप्रैल 30, 2011

गोल्डन चैरियट

लेख: उपेन्द्र स्वामी

मोटी जेबों वाले सैलानियों के लिये एक के बाद एक शाही ट्रेनें पटरियों पर उतर रही हैं। हालांकि इनमें सफर करने वालों में विदेशी सैलानियों की तादाद ज्यादा होती है क्योंकि भारतीय सैलानियों के हिसाब से ये महंगी हैं।

भारत में लग्जरी ट्रेनों की ग्राहकी तेजी से बढ रही है। यही वजह है कि मोटी जेबों वाले खास सैलानियों के लिये एक के बाद एक नई शाही ट्रेनें पटरियों पर उतर रही हैं। पैलेस ऑन व्हील्स के नये आधुनिक संस्करण को उतारने की तैयारी चल ही रही है। उधर पंजाब में भी एक लग्जरी ट्रेन लाने की चर्चा है। इन सबके बीच कर्नाटक टूरिज्म ने गोल्डन चैरियट नाम से लग्जरी ट्रेन पटरियों पर उतार दी है। दक्षिण भारत की यह पहली लग्जरी ट्रेन है। ट्रेन डेक्कन ओडीसी और पैलेस ऑन व्हील्स की ही तर्ज पर है। शानो-शौकत में भी और किराये में भी। जाहिर है निशाने पर विदेशी सैलानी ही ज्यादा हैं।

यह ट्रेन कर्नाटक व गोवा के कई पर्यटन स्थलों की फाइव स्टार सैर कराएगी। आइटी सिटी बंगलुरू से शुरू होकर हफ्ते भर की यात्रा मैसूर, काबिनी, हसन, बेलूर, श्रवणबेलगोला, हम्पी, अईहोल, पट्टाडकल, बादामी और गोवा होते हुए फिर से बंगलुरू पर खत्म होती है। ठीक एक ऐसी ही यात्रा बंगलुरू के बजाय गोवा से शुरू होकर गोवा पर खत्म होती है। बंगलुरू से यह हर सोमवार को और गोवा से हर रविवार को शुरू होती है। विश्व धरोहर के रूप में मान्य हम्पी में स्थित पत्थर के रथ के नाम पर ही इस ट्रेन को गोल्डन चैरियट नाम दिया गया है।

ट्रेन की बनावट और साज-सज्जा की बात करें तो इसमें भी राजसी छाप सब तरफ है। मैसूर व होयसला शिल्प का मुख्य तौर पर इसमें इस्तेमाल किया गया है। ट्रेन के कोचों के नाम कर्नाटक पर शासन करने वाले 11 राजवंशों- कदंब, होयसला, राष्ट्रकूट, गंगा, चालुक्य, बहमनी, आदिलशाही, संगमा, षठवष्णा, यदुकुला व विजयनगर के नाम पर रखे गये हैं। हर कोच पूरी तरह एयरकंडीशंड है। हर कोच में वाइ-फाइ, एलसीडी टीवी, डीवीडी, अल्मारी, ड्रेसिंग टेबल, राइटिंग डेस्क, प्राइवेट बाथरूम और बाकी सहूलियतें मौजूद हैं। ट्रेन में दो रेस्तरां कोच नला व रुचि, एक बार कोच मदिरा, एक कांफ्रेंस कोच, स्पा व आयुर्वेदिक मसाज की सुविधा वाला एक जिम कोच भी है।

बात करें किराये की तो उसे दो सीजन में बांटा गया है- अक्टूबर से मार्च तक का व्यस्त सीजन और अप्रैल से सितम्बर तक का सुस्त सीजन जिसमें किराये थोडे कम हो जाते हैं। कम्पार्टमेंट सिंगल, डबल व ट्रिपल तीनों श्रेणियों में हैं। इस तरह एक रात का प्रति व्यक्ति किराया 240 डॉलर (11300 रु.) से शुरू होकर 485 डॉलर (19200 रु.) तक है। सात रात और आठ दिन के पूरे सफर का प्रति व्यक्ति किराया 1660 डॉलर (66600 रु.) से शुरू होकर 3395 डॉलर (135000 रु.) तक है। क्रिसमस व नये साल के मौके पर किराये में दस फीसदी सरचार्ज जुड जायेगा। ट्रेन चूंकि अभी सैलानियों के लिये पेश ही हुई है इसलिये इसकी सुविधाओं के बारे में लोगों की राय सामने आने में थोडा वक्त लगेगा।

लेकिन जहां तक सफर की बात है तो उसमें खासी विविधता है। आइटी सिटी से शुरू होकर मैसूर व श्रीरंगपट्टम के राजमहलों की शानो-शौकत, काबिनी के वन्य जीव, वृंदावन गार्डन की बेमिसाल खूबसूरती, बेलूर व श्रवणबेलगोला जैसे धार्मिक स्थल, हम्पी जैसे प्राचीन सभ्यता के केन्द्र, बदामी, पट्टाडकल व आइहोल जैसे बेमिसाल शिल्प के केन्द्र और गोवा के समुद्र की खूबसूरती- सबकुछ अपने में समेटता है। इसलिये केवल इस विविधता के लिहाज से देखा जाये तो यह सफर अपने आप में शानदार है। किसी शाही रेलगाडी की कामयाबी में दोनों बातों की खासी भूमिका होती है- ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं और उसमें सैर की पैकेजिंग। भारत में दोनों के ही लिये उपयुक्त स्थितियां हैं। भौगोलिक विशालता, विविधता, रेल नेटवर्क, मेहमाननवाजी, सब इसमें योगदान देते हैं। ऐसे में कोई हैरत नहीं कि आने वाले सालों में देश के बाकी हिस्सों में भी ऐसी ही शाही रेलगाडियां पर्यटकों को घुमाती नजर आने लगे। आखिर कोई सैलानी किसी लग्जरी रेलगाडी में सफर करना इसीलिये पसंद करता है क्योंकि वह एकमुश्त दाम चुकाकर तमाम चिन्ताओं से मुक्त हो पूरी तसल्ली व पूरे ठाट-बाट के साथ घूमने का मजा लेना चाहता है। सफर व घूमना, दोनों में ऐसा मजा हो तो फिर बात ही क्या है।

यह लेख दैनिक जागरण के यात्रा परिशिष्ट में 20 मार्च 2008 को प्रकाशित हुआ था।


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