बुधवार, जुलाई 13, 2011

दिलकश पोखरा

भारत का सबसे निकट पडोसी नेपाल प्रकृति व संस्कृति, दोनों में हमसे काफी साझा करता है। इसलिये कई बार तो लोग नेपाल जाने को विदेश जाना भी नहीं मानते। भारत से नेपाल जाने के कई रास्ते हैं और कई वजहें भी। प्रकृति की कई बेमिसाल देन नेपाल में मौजूद हैं।

पोखरा नेपाल में दूसरी सबसे ज्यादा घूमे जाने वाली जगह है। यह 827 मीटर ऊंचाई पर स्थित है और ट्रेकिंग और राफ्टिंग के लिये भी प्रसिद्ध है। पोखरा की अदभुत प्रकृति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस जगह से 8000 मीटर ऊंचाई वाली चोटियां बस हाथ बढाकर छू लेने वाले फासले पर स्थित है। दुनिया में कहीं और आपको इतनी जल्दी एक हजार मीटर से आठ हजार मीटर ऊंचाई का सफर तय करने को नहीं मिलेगा।

फेवाताल का दृश्य और पीछे स्थित माछापुछे (6977 मीटर) पर्वत की शोभा मानों शान्ति और जादू के सम्मोहन में बांध लेती है। चारों तरफ पर्वतों से घिरी पोखरा घाटी घने जंगलों, प्रवाही नदियों, स्वच्छ झीलों और विश्व प्रसिद्ध हिमालय के दृश्यों के लिये विख्यात है। काठमाण्डू से 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित यह नगर काठमाण्डू और भैरहवा (नेपाल का एक सीमान्त शहर जो भारत के गोरखपुर से नजदीक है) से वायु और सडक मार्ग से जुडा है। पोखरा धौलागिरी, मनासलू, माछापुछे, अन्नपूर्णा जैसी महत्वपूर्ण चोटियों और अन्य हिमालयी दृश्यों का आनन्द प्रदान करता है।

क्या देखें

पर्वतीय दृश्य: पोखरा का सबसे विलक्षण दृश्य अन्नपूर्णा पर्वत श्रेणी का है जो रंगमंच के पर्दे की शोभा प्रदान करता है। वैसे अन्नपूर्णा पर्वत श्रेणी में सबसे ऊंची चोटी अन्नपूर्णा (8091 मीटर) है, लेकिन माछापुछे पडोस की सभी चोटियों पर शासन करती है। माछापुछे शिखर मेहराबदार शिखर है।

फेवा झील: यह नेपाल की दूसरी सबसे बडी झील है जो पोखरा के आकर्षण का केंद्र है। उसका पूर्वी किनारा जो बैडैम या लेकसाइड के नाम से लोकप्रिय है। यह पर्यटकों के पसन्द का निवास स्थल है जहां अधिकतर होटल, रेस्तरां और हैंडीक्राफ्ट की दुकानें अवस्थित हैं।

बेगनास और रूपा झील: ये दोनों झीलें पोखरा से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं और अपने चारों ओर स्वच्छ वातावरण के कारण पूर्णतया नैसर्गिक अनुभूति प्रदान करते हैं।

वाराही मन्दिर: फेवा झील के मध्य भाग में निर्मित यह पैगोडा शैली का दोमंजिला मन्दिर देवी शक्ति का उपासना स्थल है।

डेविस फाल: डेविस झरना एक विस्मयकारी झरना है जो पोखरा से दो किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में है।

गुप्तेश्वर गुफा: यह एक धार्मिक गुफा है जो डेविस फाल के नजदीक है। यह गुफा तीन किलोमीटर लम्बी है। गुफा के अन्दर एक शिवलिंग स्थित होने के कारण हिन्दुओं के लिये इस गुफा का विशेष महत्व है।

विंध्यवासिनी मन्दिर: देवी भगवती जो शक्ति का ही एक दूसरा स्वरूप समझी जाती हैं, यह मन्दिर उनकी पूजा का स्थल है।

कैसे पहुंचें

सभी विदेशी यात्री जो भारत से नेपाल जाना चाहते हैं उन्हें नेपाल-भारत सीमा पर जिन रास्तों का इस्तेमाल करना चाहिये, वे हैं:

1. काकडभिट्टा

2. वीरगंज

3. बेलहिया, भैरहवा

4. नेपालगंज

5. धनगढी और

6. महेंद्र नगर

सडक मार्ग से अपनी गाडी लेकर आने वाले पर्यटकों के पास नेपाल की सीमा में प्रवेश के लिये अंतर्राष्ट्रीय परिवहन प्रपत्र होना अनिवार्य है।

· दिल्ली से काठमाण्डू के लिये सीधी निजी बसें उपलब्ध होती हैं जो काठमाण्डू 28 घण्टे में पहुंचाती हैं।

· वाराणसी से सुनौली (भारत-नेपाल सीमा) की बसें छूटती हैं और दस घण्टे में पहुंचाती हैं। सुनौली से काठमाण्डू की यात्रा आठ घण्टे और पोखरा की छह घण्टे में पूरी की जाती है। गोरखपुर से भी सुनौली के लिये लगातार बसें छूटती हैं जहां पहुंचने के लिये लगभग तीन घण्टे लगते हैं।

· लखनऊ से- लखनऊ से बसें तीन घण्टे में रूपैडिहा (भारत-नेपाल सीमा) तक पहुंचाती हैं। रूपैडिहा से काठमाण्डू की यात्रा 15 घण्टे की और पोखरा की 14 घण्टे की है।

· पटना से रक्सौल के लिये चलने वाली बसें छह घण्टे में रक्सौल मुख्य टर्मिनल पहुंचा देती हैं। रक्सौल से काठमाण्डू तक की यात्रा आठ घण्टे में और पोखरा की छह घण्टे में तय की जाती हैं।

· सिलीगुडी से नेपाल की सीमा में प्रवेश के लिये पानी टंकी और काकडभिट्टा (नेपाल) तक 36 किलोमीटर की दूरी तय करनी पडती है। काकडभिट्टा से काठमाण्डू के लिये बसें मिलती हैं जो 14 घण्टे में काठमाण्डू पहुंचाती हैं।

· इसके अलावा दिल्ली से करीब आठ घण्टे में और नैनीताल से करीब साढे तीन घण्टे में बनबसा पहुंचा जा सकता है। बनबसा से महेन्द्रनगर की दूरी करीब 13 किलोमीटर की है जहां से काठमाण्डू के लिये दिन-रात बसों की सुविधा उपलब्ध है।

भारतीय मुद्रा: नेपाल के सभी बैंक एक्सचेंज काउण्टरों पर भारतीय रुपये स्वीकार हैं। लेकिन 500 और 1000 रुपये के नोट नेपाल लाना वर्जित और दण्डनीय हैं। सभी मुख्य क्रेडिट कार्ड बडे-बडे होटलों और सभी डिपार्टमेंटल स्टोर में स्वीकार किये जाते हैं। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा जारी किये गये ट्रैवलर्स चैक के बदले भी आसानी से नेपाली रुपये भुनाये जा सकते हैं।

यह लेख दैनिक जागरण के यात्रा परिशिष्ट में 26 अप्रैल 2009 को प्रकाशित हुआ था।


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