यह लेख 29 नवम्बर 2006 को दैनिक जागरण के यात्रा परिशिष्ट में छपा था।
कुछ सालों पहले तक स्कीइंग भारतीयों की नजर में विदेशी लोगों और बॉलीवुड की फिल्मों का ही शगल था। भारत में तब स्की रिसॉर्ट ऐसे नहीं थे और जो थोडी बहुत सुविधएं थीं, वे भी आम लोगों की पहुंच से दूर थीं। लेकिन तस्वीर बडी तेजी से बदल रही है। शीतकालीन ओलम्पिक खेलों में उतरने वाले एकाध नामों के साथ-साथ भारत में स्कीइंग का रोमांच धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। कश्मीर में गुलमर्ग व उत्तरांचल में ऑली अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ स्कीइंग के लिये भी खासे लोकप्रिय हो गये हैं। खास बात यह है कि इस रोमांच का अनुभव लेना अब इतना महंगा भी नहीं रहा। किसी आम छुट्टी के खर्च में ही ऑली जाकर कुछ दिन स्कीइंग का मजा लिया जा सकता है।
स्कीइंग के लिये सबसे महत्वपूर्ण बात बर्फबारी के लिये उपयुक्त मौसम के साथ-साथ पहाड पर लम्बा व सुरक्षित ढलान होती है। आप स्की पर बीस-पच्चीस मीटर फिसलने का मौका कहीं भी आजमा लें लेकिन कायदे की स्कीइंग हर जगह नहीं हो सकती। ऑली जैसी इस जगह की खूबसूरती इसी में है कि वह आपको स्कीइंग के लिये खुद-ब-खुद आमंत्रित करती है। जगह के साथ-साथ शौक व आनंद, दोनों की सुविधाएं हों तो क्या कहना। ऑली में यह सब कुछ है। गढवाल मंडल विकास निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के बूते इसकी तुलना दुनिया के सर्वोत्तम स्की स्थलों से की जा सकती है। पिछले कुछ सालों से यहां स्कीइंग समारोहों के अलावा राष्ट्रीय स्की चैम्पियनशिप भी होती है।
ऑली में बर्फ से ढके ढलानों के किनारे पर देवदार के पेडों की कतारें हैं जो हवा के वेग को रोककर स्कीइंग के लिये उपयुक्त माहौल तैयार करती है। ऑली से नंदादेवी (7817 मीटर), कामेट (7756 मीटर), माना (7273 मीटर) और दूनागिरी (7066 मीटर) चोटियों का खूबसूरत नजारा मिलता है। मौसम खुला हो तो ये चोटियां इतनी पास नजर आती हैं कि आपका मन छलांग लगाकर उन तक पहुंचने का करेगा। यूं तो ऑली गर्मियों में हिल स्टेशन की तलाश करने वालों के लिये भी उपयुक्त जगह है लेकिन इसकी असली ख्याति कडाके की सर्दी में स्कीइंग का लुत्फ लेने से ही है। फिर किसी बर्फीली जगह का बाकी आनंद तो है ही। तो अगर है मन में इस बार कुछ नया करने की तो नजर डालिये बाकी बातों पर, बनाइये प्लान और निकल जाइये रोमांच के सफर पर।
स्कीइंग प्रशिक्षण
यह ऑली का सबसे खास आकर्षण है। स्कीइंग के लिहाज से ऑली किसी नौसिखिये और पेशेवर, दोनों के लिये उपयुक्त है। स्कीइंग के लिये उपकरण और इंस्ट्रक्टर तो यहां हमेशा किराये पर उपलब्ध रहते ही हैं। गढवाल मंडल विकास निगम जनवरी से मार्च के बीच स्कीइंग के कोर्स भी आयोजित करता है। इस बार (2007 में) इन कोर्स की शुरुआत आठ जनवरी से होगी और 30 मार्च तक ये चलेंगे। सात दिन के कोर्स की फीस प्रति व्यक्ति 4710 रु. है और 14 दिन के सर्टिफिकेट कोर्स की फीस प्रति व्यक्ति 9440 रु. है। छात्रों के लिये इसमें थोडी रियायत मिल जाती है। इस फीस में ठहरना (डोरमेट्री में), खाना, स्की उपकरण, लिफ्ट व प्रशिक्षण का शुल्क शामिल है। इसके अलावा अगर आपको केवल दिनभर के लिये मौज करनी हो तो 300 रुपये किराये में दिनभर के लिये उपकरण और 175 रुपये में स्की का पाठ मिल सकता है। दस्तानों व चश्मे का किराया अलग से। सरदी के इंतजाम के कपडे तो आपको खुद ही ले जाने होंगे।
बुकिंग, प्रशिक्षण आदि के संबंध में ज्यादा जानकारी के लिये उत्तरांचल पर्यटन विभाग की वेबसाइट www.ua.nic.in/uttaranchaltourism को टटोला जा सकता है।
एक नजर
ऊंचाई: समुद्र तल से 2915-3049 मीटर के बीच। ज्यादा रोमांच लेना चाहें तो 3400 मीटर तक की ऊंचाई तक आप जा सकते हैं।
स्कीइंग स्थल का क्षेत्रफल: 5 वर्ग किलोमीटर।
तापमान: गर्मियों में 13 से 29 डिग्री सेल्शियस और सरदियों में 2 से 9 डिग्री सेल्शियस।
कपडे: सरदियों में यहां रातें बर्फीली होती हैं, इसलिये मोटे गरम कपडे जरूरी हैं।
कैसे पहुंचें
दिल्ली या देश के किसी भी हिस्से से हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश पहुंचें। हरिद्वार के लिये दिल्ली, कोलकाता व मुम्बई से सीधी ट्रेनें हैं। सबसे निकटवर्ती हवाई अड्डा जौली ग्रांट (देहरादून) है।
बद्रीनाथ सडक मार्ग पर जोशीमठ की दूरी ऋषिकेश से 253 किलोमीटर व देहरादून से 298 किलोमीटर है। इस रास्ते पर बसें, टैक्सी व प्राइवेट वाहन लगातार चलते हैं, पर यह रास्ता दिन में ही सफर करने का है।
जोशीमठ से ऑली की दूरी ऊपर पहाडी में 16 किलोमीटर है। यहां जाने के लिये सडक मार्ग के साथ-साथ केबल कार भी है। सडक मार्ग पर बसें नहीं चलती इसलिये जोशीमठ से टैक्सी करनी होगी। सर्दियों में सडक मार्ग पर बर्फ गिरी हो तो केबल कार ही सबसे उपयुक्त विकल्प होता है।
बुनियादी सुविधाएं
-ऑली में गढवाल मंडल विकास निगम का गेस्टहाउस और कुछ निजी रिसॉर्ट भी हैं। जोशीमठ में भी रुकने के लिये हर बजट के होटल हैं।
-जोशीमठ (1906.3 मीटर) से गोरसों (3016.3 मीटर) यानी स्की ढाल के ऊपरी छोर तक 3.9 किलोमीटर लम्बी केबल कार उपलब्ध है।
-स्की स्थल पर पांच सौ मीटर लम्बी स्की लिफ्ट और आठ सौ मीटर लम्बी चेयर लिफ्ट भी है जो स्की करने वालों को निचली ढाल से ऊपरी ढालों तक ले जाती है। इससे उन्हें स्की उतारने या बर्फ में चढाई करने का जोखिम नहीं उठाना पडता।
-बर्फ को लगातार स्की के उपयुक्त बनाये रखने के लिये स्नोबीटर हैं।
-संचार की कारगर सुविधा है और सेना व सिविल अस्पताल भी निकट ही हैं। आपात स्थिति में बचाव के लिये हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध रहते हैं।
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